

नरेंद्र मोदी, किसान विरोधी!
यही नारा स्वराज इंडिया के संयोजक योगेंद्र यादव ने किसानों के संग लगाया जब उन्होंने संसद सड़क पर किसानों की बैठक को संबोधित किया।
दो दिवसीय किसान मुक्ति मार्च जो कि 29 नवंबर 2018 को राम लीला मैदान में शरण लिए हुए थे वो आज यानी 30 नवंबर को संसद तक मार्च करेंगे। तकरीबन 24 शहरों से आए 35,000 किसान आपनी मांगे लेकर दिल्ली आए है। भारी संख्या में जुटे इन किसानो की रैली में कुछ किसान, मृत किसानों की खोपड़ियों के संग नज़र आए तो कुछ परिवार में मृत किसान साथियों की तस्वीर उठाए नज़र आए।
29 नवंबर को अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर तले लगभग 200 किसान संगठनों, राजनीतिक दलों और अन्य समाजिक संगठनों से किसानों की मांग का समर्थन करते हुये आंदोलन में भागीदारी की। समिति के महासचिव अवीक शाहा और स्वराज इंडिया के संयोजक योगेन्द्र यादव की अगुवाई में दक्षिण पश्चिमी दिल्ली के बिजवासन से 29 नवंबर को सुबह किसान मुक्ति यात्रा सबुरु हुई थी जो कि लगभग 25 किमी की पदयात्रा कर देर शाम रामलीला मैदान पहुंचे।

विपक्ष से पूर्ण समर्थन के साथ आज 30 नवंबर को किसान संसद तक का मार्च शुरू कर चुके है जिसमे वो निम्न माँगो पर सरकार पर ज़ोर बनाएंगे-
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10 वर्ष से अधिक डीजल वाहनों के संचालन पर लगाई गई रोक से किसानों के ट्रैक्टर, पम्पिंग सैट, कृषि कार्य में प्रयोग होने वाले डीजल इंजन को मुक्त किया जाए।
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किसानों का बकाया गन्ना भुगतान ब्याज सहित अविलम्ब कराया जाए.
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न्यूनतम समर्थन मूल्य को वैधानिक दर्जा देते हुए देश के किसानों की सभी फसलों का (फल, सब्जियां व दूध) वैधानिक उचित और लाभकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य डॉ स्वामीनाथन द्वारा सुझाए गए ब2 फार्मूले के अनुसार, कृषि विश्वविद्यालय की वास्तविक लागत के आधार पर तय किया जाए व उस पर कम से कम 50% लाभ जोड़कर समर्थन मूल्य घोषित किया जाए।
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मनरेगा को खेती से लिंक किया जाए।
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देश के किसानों के सभी तरह के कर्ज माफ किए जाए।
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किसानों की न्यूनतम आमदनी सुनिश्चित की जाए. लघु एवं सीमान्त किसानों को 60 वर्ष की आयु के बाद कम से कम 5000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।
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आत्महत्या करने वाले किसानों के परिवारों का पुनर्वास करते हुए परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
इन सबके बीच पुलिस ने अपनी तरफ से पुख्ता इंतज़ाम किए है। दिल्ली पुलिस ने लगभग 3500 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा इंतजाम के लिये तैनात किया है। दिल्ली के कई इलाकों में जाम की स्तिथि बनी हुई है। सरकार क्या कदम उठाएगी इस माह रैली के चलते इसका नतीजा शाम तक ही पता चलेगा। 2019 के चुनाव से पहले विपक्ष का इस महा रैली का समर्थन करना और इस संख्या में सरकार के खिलाफ किसानों का आक्रोश भाजपा के लिए हार का सबब बन जाएगा? इन सवालों के जवाब शाम की बैठक के बाद कही पता चलेगा।

Picture source: Twitter and Instagram
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